2010/12/16

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होठों से लगा लो जल्दी से ;छलका ना देना ये पैमाना ,
मुझसे बिछड़ने का गम इतना ; कहीं खुद से जुदा ना हो जाना !
मुझे गीत सुनकर प्यार का ;हंसके विदा तुम करना ,
कही रोक ना ले मेरे कदमो को , आँखों में ना तुम आंसू लाना  !


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क्यों दिल के सोये अरमान जगा रहे हो ;
हम चाहते है भूलना क्यों सामने आ रहे हो,
तू नहीं हासिल तुझको सपना बना रखा है ;
देखते है तुझे खवाबों में ज़माने से छुपा रखा है !

2010/12/13

अब हम जवान हो चले है

चाहत थी हमे बच्चा ना कहे कोई ,
अब हम जवान हो चले है .................
जो काम बड़े कर सकते है वो हम भी कर सकते है
भार सोंप कर तो देखो , अब हम जवान जो हो चले है !
चाहत है हाथ बड़ो का बँटाये ,बच्चे नहीं;
हम भी बड़े हो रहे है ,अब हम जवान हो चले है  !
कहते है बड़े जिमेदारी नहीं उठा पाओगे ;
कहते तो हो , हम जवान हो चले है !
ना उठा पाओगे जिंदगी कि सच्चाई ;
बच्चे ही रहो ना कहो जवान हो चले है !
बच्चे रह कर जियो बचपन को ;
सोच कर कहना हम जवान हो चले है !
अहसास हो रहा है , बात सच थी उनकी ;
अब जब हम जवान हो चले है .........!
मुस्कुराना चाहे तो भी ना मुस्कुरा पाते है ;
पता चल रहा है धीरे-२ हम जवान हो चले है !
दो पल चैन के बड़ी कीमत मांगते है -२
कहते है अब तुम जवान हो चले हो !
दुखो के कर्ज में डूब गई ये जवानी ,
आखिर क्यों हम जवान हो चले है !
आंसुओ में धुलती ये जवाई पूछती है ,
क्यों !
क्यों कहते हो कि अब हम जवान हो चले है.......................

                                            सागर मल शर्मा "शरीफ "

महोब्बत

करले हसरत पूरी उनके दिदार कि -२
ज़िन्दगी-ऐ-रात अभी बाकी है जरा सी !
निशान ढूंढो तो मिल ही जायेंगे मेरे -२
अभी बाकि है खाक-ऐ-मकान में चिंगारी जरा सी !
अगर सुन लेता उनके प्यार क दो बोल मैं -२
और जी  लेता मैं ज़िन्दगी जरा सी !
उस को सितम-ऐ-कुदरत कहिये -२
वो हो जाते हमारे अगर नो होती देर जरा सी !
हम पुकारते है तो चले आते है अक्सर -२
तूफान बन गई है जो महोब्बत थी जरा सी !
आके कर जाते है वो मेरी कब्र और गीली-२
मेरी रूह ने नम करदी थी जो जरा सी !


                                 सागर

2010/12/11

दोस्ती...................

दिल से निकले जो आवाज वो दिल तलक जाती है -२
उनकी खुशी जब अपनी ख़ुशी बन जाती है....
उनके दर्द पर जब अपनी आँखों से निकले आंसू ;
दुनिया ऐसे रिश्तों को "सागर" दोस्ती बुलाती है !