2017/06/18

पितृ दिवस

आज बेटा मिलने आया है काका... वृद्ध आश्रम में सेवा करने वाले नोकर ने कहा... बाप बेटे की शक्ल देखने को तरस रहा था.. पर न तो आज पेंशन आयी है और ना ही उनके पास और कुछ बचा है जो बेटे के नाम नही किया..बाप ने सोचा,चलो छोड़ो कम से कम बेटे को याद तो आई.... जैसे ही बाप बेटे के सामने पहुंचा.. बेटा बोला पापा आपको कितना टाइम लगता है आने में??? बेटे ने पापा को पास बुलाया selfie ली और ये बोलते हुए वापस चल दिया  office को लैटे हो रहा हूँ... कुछ चाहिए होगा तो फ़ोन करवा देना... बाप खुश था पर उसके लिए जिसने fathers day पर सेल्फी का चलन शुरू किया ....जाते जाते पापा ने आवाज लगाई की बता दिया कर बेटा.... एक नये कपड़ो की जोड़ी है वो पहन लिया करूँगा... तेरे दोस्त फोटो देखते होंगे facebook पर,।।।।।


                                                                                                                    सागर 

2016/04/23

होश

उफ़
ये जो ख्याल है तेरा ........होश आता क्यों नहीं
होश आये ना  खुद़ा ......गर ख्यालो मे तू रहे सागर ।

2013/06/02

जूनून.........

जूनून कामयाबी लाने का इस कदर हो तूझ पे !
ख्वाब भी आये तो कामयाबी लाने का आये !


उमंग मन मे हो जीत की जोश लहरो से खेलने का !
जाना है उस किनारे पे चाहे लाख तुफान आये !


मंजील पाने मे मुस्किलो का सामना भी जरुरी है !
सम्भल – 2 के चले गिरे फिर सम्भल जाये !


जो खूद बने सहारा किसी का उसे सहारे की क्या जरुरत !
चल पडो जहाँ  मंजिल मिले संग कोइ आये ना आये !


काम करो तो ऐसा करो सागर कि बस मजा आ जाये !

इस जहान से जब जाये तो हर जुबां पे तेरा नाम आये !

2012/10/14

कैसे जीता रहा हूँ.........


कैसे कहूँ तुझ से कैसे जीता रहा हूँ ;
हर दर्द का घूँट पिता रहा हूँ मैं !


कभी हर पल जिया ख़ुशी के साथ ;
कभी घुट घुट के मरता रहा हूँ मैं !


कुछ दर्द देते थे ;लगाते थे मरहम कुछ ;
हर दोस्त हर दुशमन को आजमाता रहा हूँ मैं !


दर्द था मेरे दिल में लेकिन तूझे न महसूस हुआ ;
खता मेरी थी हर पल मुस्कुराता रहा हूँ मैं !


अफ़सोस उम्र भर रहा तुने कभी सदा न दी ;
तेरे दर से रोज खाली जाता रहा हूँ मैं !

ऐसा नहीं याद सिर्फ मेने किया तूझको "सागर " ;
है मालूम मुझे ;तूझे भी याद आता रहा हूँ मैं !


2012/05/26

दो पल ...........

दो पल ही काफी थे समझने के लिए ,
मेरे प्यार की कहानी इतनी लम्बी ना थी !

ना मज़बूरी का नाम देंगे इसको ;
ना बेवफाई कोई कह सकता है ,
मैं नहीं चाहता था इस तरह जीना ,
और तू भी ऐसे जी कर खुश ना  थी !

दो पल ही काफी थे समझने के लिए ,
मेरे प्यार की कहानी इतनी लम्बी ना थी !

बदमिजाजी जब महोब्बत में बहुत हो गयी ,
बेरुखी सी आशिकी होने लगी थी !
प्यार करने का तब मजा जाता रहा ,
जब हर बात पे तकरार होने लगी थी !

दो पल ही काफी थे समझने के लिए ,
मेरे प्यार की कहानी इतनी लम्बी ना थी !

भीड़ में दोनों पागल से रहते थे ,
तन्हाई में भी खुद को समझते रहे !
दुनिया वालो की परवाह करके बहुत जिए ;
एक दुसरे की कभी कहीं परवाह ना थी  !

दो पल ही काफी थे समझने के लिए ,
मेरे प्यार की कहानी इतनी लम्बी ना थी !

एक दुसरे का साथ ही तो साथ नहीं होता ,
दूर रह कर भी क्या कोई पास नहीं होता  ,
तेरी  जिद को भला प्यार का नाम कैसे दे दूँ  ;
इतनी कमजोर आज तक कभी जवानी ना थी !

दो पल ही काफी थे समझने के लिए ,
मेरे प्यार की कहानी इतनी लम्बी ना थी !

साथ रहकर भी कहाँ साथ होते थे ,
झूठी हंसी होठो पे ;अंदर दर्द होता था !
जब ये साथ ही दर्द बढाने लगा "सागर " ,
तो भलाई दूर हो जाने में ही थी !

दो पल ही काफी थे समझने के लिए ,
मेरे प्यार की कहानी इतनी लम्बी ना थी !