2010/12/11

इश्क क्या है

इश्क क्या है हमको तो कहीं मिलता ही नहीं-२ 
बहुत ढूँढा है रह गुजर में कहीं मिलता ही नहीं !
इश्क क्या है ..........................
मैंने इन फिजाओं में लगाई है आवाजें बहुत-२
इश्क लगता है बहरा वो सुनता ही नहीं !
इश्क क्या है ..........................
में ढूँढने को उसको अखबार में छपवा दू -२
सुना है मगर इश्क है अँधा उसे दिखता ही नहीं !
इश्क क्या है..................................
बाज़ार में पैसे दे कर खरीद लता में इश्क को -२
मगर बाजारों में इश्क बिकता ही नहीं !
बहुत ढूँढा है रह गुजर में कही दिखता ही नहीं !
कहीं मिलता ही नहीं............
इश्क क्या है हमको तो कही..................

2010/12/08

दर्द के दो आंसू

दर्द के दो आंसू ,मेरे आस पास रहते है ,
मेरी तन्हाइयो का साथ निभाने अक्सर चले आते है ,
मेरे आस पास घूमते है,टहलते है, चहल कदमी करते है,
और फिर लोट जाते है मेरे दिल के अँधेरे कोने में ,
मेरी आत्मा बैठी है जो कोने में कचोटते है उसको ,
उजाला जो फैला है छोटी सी बाती का ...........फूँक मार कर भुजाना चाहते है,

दर्द के दो आंसू ,मेरे आस पास रहते है ,


दर्द के दो आंसू ,मेरे आस पास रहते है ,
मेरे शरीर पर यादो के निशाँ घाव बनकर रह गए है ,
उन निशानों पर गिरकर ये जलाते है उनको ,
कभी कभी सूख जाते है ,नहीं दिखते ,
कभी सुबकियों के साथ बहते है अनवरत ,
लगता है घावों पर नमक छिड़का किसी ने अभी अभी ,
दर्द के दो आंसू ,मेरे आस पास रहते है ..................


दर्द के दो आंसू ,मेरे आस पास रहते है ,
कभी हंसी आने लगती है कभी खिलखिलाते है ,
कभी जख्मी दिल कि दीवारों को खरोचते है ,
पसीने में धुल जाते है,कभी मिल के बहते है ,
गालों पे निशान उफनी नदी सा बनाते  है ,
आँखे सूज जाती है जैसे समुन्द्र में डेल्टा बनते है ,
दर्द के दो आंसू ,मेरे आस पास रहते है ,



दर्द के दो आंसू ,मेरे आस पास रहते है ,
भूल जाता हूँ कभी कभी दर्द ढूख सारे कभी,
ज़िन्दगी आगे बढ़ने के लिए कहती है ,होंसला बढाती है ,
कभी लगता है ये आंसू मुझे सहारा देते है ,
मेरे दर्द का कारण बता कर,मेरी मंजिल कि याद दिलाते है ,
प्यासे होंठो को गीला कर के प्यास भूजाते है ,
दर्द के दो आंसू ,मेरे आस पास रहते है , दर्द के दो आंसू .......................

2010/12/07

सागर तुम तो बिगड़ गए

छुट गई हाथों से माला ,मोती सरे बिखर गए !
आँखों में सपने रखे थे, ना जाने वो किधर गए !
वक़्त हमारे साथ था ,पलपल लेकिन छीनता रहा !
लम्हे जो प्यार भरे थे मेरे ,जाने कब वो बीत गए !


खून शरीर का भी अब तो तेज रवानी में रहता है !
गुस्से में रहने लगे ,तेवर भी तो बदल गए !
लोग कहते है कि तुम जाने हो गए कैसे यार !
मतलब कि ही बात है करते " सागर " अब हम संभल गए !

साथ जो चलने कि कोशिश कि वक़्त ने नाता तोड़ दिया !
वक़्त तो आगे निकल गया , हम कितना पीछे छुट गए !
वक़्त मुताबिक ढलने कि कोशिश कि हमने,और बदले भी !
दुनिया बोली बिगड़ गए पर  हमे लगा हम सवर गए !

2010/12/02

रोशनी

मुद्दा ये है की रोशनी आएगी कैसे -२ ;
जो अँधेरे में  है रास्ता  उनको दिखाएगी कैसे -२,
हम यूँ ही ना मर जाये औरो की तरह " सागर "
लोगो को याद हमारी आएगी कैसे........... ! लोगो को याद ...........

तेरा इंतज़ार

खवाबों में उभरती गई आँखों से छलकती गई-२
तेरी याद में रोते दिल की आहें सी निकलती रही !
सुबकियाँ ही सुनाई देती थी ,इक बूँद टपक जाने के बाद-२
तडपते दिल की चीखें सन्नाटा चिर के निकलती रही !
मेरे दिल के सवालों का जवाब यही दिया उसने -२
में अर्ज किया करता वो हस के निकलती रही !
इंतज़ार की हद से भी बहूत आगे निकाल आया में -२
हर सुबह करता इन्तजार वो खवाबों में मिलती रही !
उसको डर था मुझसे के कही में दिल मांग ना लू -२
में तकाजा करता रहा वो यूँ ही डरती रही !
अपना भी दीवानापन था हम कहते थे जान ले लो-२
उसके दो आंसू ना गिरे मेरी जिस्म-ओ-जान पिघलती रही !
मेरी आरजू थी आखिरी इक बार वो अपना कहदे -२
पर वो जालिम ना मानी, मेरी सांसे निकलती रही !
पर आस नहीं टूटी सोचा कहेगी मरने के बाद -२
वो नहीं आई " सागर " मेरी चिता यूं ही जलती रही !
                                   मेरी चिता यूं ही जलती रही ..................